Thursday, October 17, 2019

सुधीर चौधरी के फेक न्यूज पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा- इसपर चलाओं मानहानि का मुकदमाकेस

सुधीर चौधरी के फेक न्यूज पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, कहा- इसपर चलाओं मानहानि का मुकदमा

By,Babu Gautam
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फेक न्यूज और गोदी मिडिया। भारत में एक अपना नया जकड़ा हुआ जाल बिछा लिया है। आए दिन फेसबूक पर फास्ट फैक्ट कई न्यूज को जांच परख कर सच्चाई सामने लाती है। अब फेक न्यूज को मामले में जी न्यूज के प्रमुख सुधीर चौधरी पर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त हो गई है। सुधीर चौधरी के खिलाफ TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने कुछ दिन पहले आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज करवाया था, जिसे आज दिल्ली हाईकोर्ट ने हरी झंडी दे दी है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने आज सेशंस कोर्ट के उस आदेश को आज निरस्त कर दिया, जिसमें ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाई गई थी. अब इस मामले में ट्रायल कोर्ट सुनवाई करेगा.इससे पहले पटियाला हाउस कोर्ट की सेशंस जज ने ट्रायल कोर्ट में चल रही कार्यवाही पर रोक लगाने का आदेश दिया था. सेशंस कोर्ट के इस आदेश को महुआ मोइत्रा ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
पिछले 15 जुलाई को पटियाला हाउस कोर्ट ने महुआ मोइत्रा की इस अर्जी पर संज्ञान लिया था. महुआ मोइत्रा की याचिका में कहा गया है कि महुआ मोइत्रा ने लोकसभा सदन में अपने भाषण में फासिज्म के सात संकेतों का जिक्र किया था
इस भाषण के बारे में सुधीर चौधरी ने अपने टीवी प्रोग्राम में ये आरोप लगाया कि महुआ मोइत्रा का भाषण चुराया हुआ था. महुआ मोइत्रा के वकील शादान फरासत ने कोर्ट से कहा कि भाषण में अमेरिकी म्युजियम में प्रलय के पोस्टर का जिक्र करते हुए उसके संकेतों को फासीवाद के शुरुआती संकेत बताया।
महुआ मोइत्रा ने अपने भाषण में कहा था कि भारत में भी फासीवाद के शुरुआती संकेत उसी पोस्टर के संकेतों की तरह हैं. महुआ मोइत्रा ने अपने भाषण में उस पोस्टर का जिक्र किया था.
याचिका में कहा गया है कि सुधीर चौधरी ने अपने प्रोग्राम में कहा कि महुआ मोइत्रा ने घृणापूर्ण भाषण दिया और वो भाषण चोरी किया हुआ था. सुधीर चौधरी ने अपने प्रोग्राम में कहा कि महुआ मोइत्रा ने दूसरे का भाषण चुराकर अपना बताया और लोकसभा में स्पीच पुरी की।
सुधीर चौधरी ने अपने प्रोग्राम में कहा था कि अमेरिकी लेखक मार्टिन लांगमैन ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का जिक्र करते हुए जो आलेख लिखा था वही महुआ मोइत्रा ने अपने भाषण में हूबहू बोला था. उसके बाद कोर्ट ने संज्ञान लेते हुए महुआ मोइत्रा का बयान दर्ज कराने का आदेश दिया.

'पापा चीखते रहे, पुलिसवालों ने पीट-पीटकर मार डाला', हापुड़ में बच्चा रोते हुए बोला

बाबू गौतम
   12.93 K शेयर्स


उत्तर प्रदेश पुलिस की सांकेतिक तस्वीर और मृतक प्रदीप तोमर के घर मातम की तस्वीर

उत्तर प्रदेश पुलिस की वर्दी लगातार दागदार हो रही है. योगी जी ने अपराधियों को ठोकने का फ़रमान पहले ही दिया हुआ है. लेकिन यूपी पुलिस बार-बार एनकाउंटर और हिरासत में हुई मौतों पर सवालों के घेरे में आ ही जाती है. अब हापुड़ में पुलिस हिरासत में मौत का मामला सामने आया है. मामला पिलखुआ थाना क्षेत्र का है. यहां दो महीने पहले एक महिला की मौत का मामला सामने आया था. इस मामले में पूछताछ के दौरान 13 अक्टूबर की रात पुलिस कस्टडी में एक युवक की मौत हो गई. आरोप है कि पुलिस ने उसके साथ थर्ड डिग्री का प्रयोग किया. अब युवक की मौत पर गांव वालों ने मेरठ तक हंगामा और प्रदर्शन किया है.

# पूरा मामला क्या है

पिलखुवा थाना क्षेत्र के राजकुमार तोमर किसान हैं. उनका बेटा प्रदीप खेती में पिता का साथ देने के अलावा गार्ड की भी नौकरी करता था. रविवार 13 अक्टूबर की रात राजकुमार का छोटा बेटा कुलदीप अपनी भाभी और भतीजों को लेकर बाइक से घर लौट रहा था. परिवार के लोग के लोग बता रहे हैं कि पिलखुवा की छिजारसी चौकी के पास पुलिस वालों ने बाइक रोक ली और फोन कर के प्रदीप को चौकी पर बुलवाया. परिवारवालों का कहना है कि पुलिस ने प्रदीप के भाई, पत्नी और बच्चों को दूसरे कमरे में बैठाया और प्रदीप से 30 अगस्त को हुई महिला की हत्या के मामले में पूछताछ शुरू की. जिस महिला के बारे में पूछताछ की जा रही थी वो  गौतमबुद्ध नगर की रहने वाली थी. और रिश्ते में प्रदीप के साले की पत्नी थी. पुलिस को शक था की प्रदीप का इस महिला की हत्या से कोई न कोई लेना देना है. आरोप है कि पूछताछ के नाम पर पुलिसवाले देर रात तक प्रदीप तोमर को पीटते रहे. जिससे उसकी हालत खराब हो गई. इसके बाद पुलिस प्रदीप को लेकर पिलखुवा के जीएस मेडिकल कॉलेज गई जहां से उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज के लिए रेफर कर दिया गया. जहां देर रात डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया.
सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी वायरल हुआ है जिसमें प्रदीप तोमर के मृत शरीर पर कई जगह ढेरों निशान दिखाई दे रहे हैं.

उस वायरल वीडियो का स्क्रीन ग्रैब जिसमें प्रदीप तोमर के मृत शरीर पर निशान दिखाए गए हैं

# पता चलते ही गांव वालों ने चौकी घेर ली

सोमवार सुबह गांव में प्रदीप की मौत की सूचना मिली. परिवार के लोग गांव वालों के साथ पहले पुलिस चौकी और फिर थाने पहुंचे. यहां पर प्रदर्शन और घेराव किया. इसके बाद ये लोग मेरठ पहुंच गए. प्रदर्शन कर रहे लोगों की मांग है कि आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया जाए.

# मृतक प्रदीप तोमर का बेटा क्या कहता है?

प्रदीप तोमर का 12 साल का बेटा बता रहा है कि पिता के साथ पहले पुलिसवालों ने गाली गलौज की. फिर उन्हें पीटना शुरू कर दिया. पिता बार-बार पूछते रहे कि उनका कुसूर क्या है? लेकिन पुलिस वाले नशे में धुत्त थे और लगातार प्रदीप को लात घूंसों से पीटते रहे. मृतक प्रदीप का बेटा ये भी बता रहा है कि जब उनके पिता को अस्पताल ले जाया गया तो भी वहां उनका इलाज नहीं किया गया बल्कि उन्हें एक कमरे में बंद कर दिया गया था. प्रदीप तोमर का बेटा ये भी बता रहा है कि पुलिस वालों ने चार पांच बोतल शराब तो उसके सामने ही पी थी.

# प्रदीप के पिता और पत्नी क्या कह रहे हैं?

प्रदीप के पिता पुलिस चौकी पर तैनात बाक़ी पुलिस वालों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं. प्रदीप के पिता राजकुमार तोमर ने कमिश्नर को दी तहरीर में कहा है कि पिलखुवा पुलिस ने उनके बेटे प्रदीप को पूछताछ के नाम पर यातनाएं दी हैं जिससे उसकी मौत हो गई. तहरीर में मांग की गई कि इस मामले में सीओ, थाना प्रभारी और चौकी इंचार्ज पर हत्या का केस दर्ज कर के कार्रवाई की जाए.
मृतक प्रदीप तोमर की पत्नी भी कमोबेश वही कह रही हैं जो प्रदीप के पिता कह रहे हैं. दोषी पुलिस वालों पर कार्रवाई और सरकार से आर्थिक मदद मांग रही हैं.

# पुलिस क्या कह रही है?

हापुड़ के पुलिस अधीक्षक यशवीर सिंह ने स्थानीय मीडिया को बताया –

30 अगस्त को लाखन गांव के जंगलों से एक महिला की अधजली लाश मिली थी. वो प्रदीप तोमर के साले की पत्नी थी. जांच के दौरान वह प्रदीप तोमर शक के घेरे में आया. पूछताछ के दौरान उसकी तबीयत बिगड़ी, जिसके बाद उसे स्थानीय अस्पताल ले जाया गया. इसके बाद उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. क्योंकि पुलिसकर्मियों ने इस पूरी प्रक्रिया के दौरान किसी तरह के नियमों का पालन नहीं किया और प्रदीप को कस्टडी में लेते समय अपने सीनियर्स को इसकी जानकारी नहीं दी, इसलिए इंस्पेक्टर योगेश बालियान, चौकी प्रभारी अजब सिंह और कॉन्स्टेबल मनोज को सस्पेंड कर दिया गया है. मामले की विभागीय और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए हैं.

इस मामले में मेरठ जोन के आईजी ने कहा है कि पुलिस हिरासत में किसी की भी मौत मानवाधिकारों का उल्लंघन है और इसकी पूरी जिम्मेदारी पुलिस की है. पुलिस कस्टडी में आरोपी के साथ मारपीट गैरकानूनी है, यह अमानवीय है. इस घटना में जो भी पुलिसवाले लिप्त हैं उन्हें इसकी सजा मिलेगी.
फ़िलहाल किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए पिलखुवा और आसपास के गांवों में पीएसी और पुलिस को तैनात कर किया गया है.
लेकिन बड़ा सवाल अब भी यही है कि क्यों उत्तर प्रदेश पुलिस पर बार-बार इनकाउंटर और हिरासत में मौत के मामलों में सवाल उठ ही जाते हैं?
ये भी देखें:
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केंद्रीय मंत्री के बिगड़े बोल, कहा- युवाओं को ‘नौकरी’ देने का हमने ठेका नही ले रखा रखा है

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अजीब अजीब तर्क। महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव होनें है सभी पार्टियाँ प्रचार करने के लिए अपना पुरा दम खम लगा रही है। पिछले दिनों मोदी सरकार के कद्दावर मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद सिंह चुनाव प्रचार के लिए मुंबई गए हुए थे। वहां पर मिडिया से बातचीत करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा, “मैं आपको 10 मापदंड बता सकता हूं जहां अर्थव्यस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही है लेकिन एनएसएसओ की रिपोर्ट में इनमें से किसी को नहीं दिखाया गया है. इसलिए मैं इस रिपोर्ट को गलत कहता हूं.”
प्रसाद ने अर्थव्यवस्था में गिरावट की धारणा को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा, “इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण, सूचना एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र, मुद्रा लोन और वाणिज्यिक सेवा क्षेत्र बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं. हमने कभी नहीं कहा था कि हम सभी युवाओं को सरकारी नौकरी देंगे.” उन्होंने कहा, “कुछ लोग सरकार के खिलाफ मोर्चा बनाकर बेरोजगारी के मुद्दे पर लोगों को गुमराह करने का काम कर रहे हैं.”
प्रसाद की अर्थव्यवस्था के लेकर टिप्पणियां ऐसे समय आई हैं जब विश्व प्रतिस्पर्धा सूचकांक रिपोर्ट में भारत का स्थान दस पायदान नीचे आ गया. दूसरी तरफ औद्योगिक सूचकांक अगस्त माह में 1.1 प्रतिशत नीचे आ गया जो कि पिछले सात साल के दौरान सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा है. प्रतिस्पर्धा सूचकांक के बारे में अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुये वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, ‘‘आप नवोन्मेष, स्टार्ट अप और बाजार आकार मापदंडों को देखिये, हम सबमें सुधार ला रहे हैं. यह सच है कि कुछ अन्य मापदंडों में हम नीचे आये हैं।



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भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी हुआ पीछे- पाँच बड़ी ख़बरें

भारत पाकिस्तान और बांग्लादेश से भी हुआ पीछे- पाँच बड़ी ख़बरें

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ग्लोबल हंगर इंडेक्स में 117 देशों की सूची में भारत 102वें नंबर पर आ गया है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स में नीचे होने का मतलब है कि भारत में लोग भर पेट खाना नहीं खा पा रहे हैं, बाल मृत्यु दर ज़्यादा है, बच्चों का लंबाई के अनुसार वजन नहीं है और बच्चे कुपोषित हैं.
भारत एशिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था है और दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी लेकिन ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत दक्षिण एशिया में भी सबसे नीचे है.
इसका मतलब ये है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश और नेपाल के लोग भारतीयों से पोषण के मामले में आगे हैं. भारत इस मामले में ब्रिक्स देशों में भी सबसे नीचे है. पाकिस्तान 94वें नंबर पर है, बांग्लादेश 88वें, नेपाल 73वें और श्रीलंका 66वें नंबर पर है.
भारत 2010 में 95वें नंबर पर था और 2019 में 102वें पर आ गया. 113 देशों में साल 2000 में जीएचआई रैंकिंग में भारत का रैंक 83वां था और 117 देशों में भारत 2019 में 102वें पर आ गया.
बेलारूस, यूक्रेन, तुर्की, क्यूबा और कुवैत जीएचआई रैंक में अव्वल हैं. यहां तक कि रवांडा और इथियोपिया जैसे देशों के जीएचआई रैंकों में सुधार हुए हैं. जीएचआई इंडेक्स की रैंकिंग आयरलैंड की ऐड एजेंसी कंसर्न वर्ल्डवाइड और जर्मन ऑर्गेनाइज़ेशन वेल्ट हंगर तैयार करते हैं.

Tuesday, October 15, 2019

एक झटके में समाप्त कर दी गई 25 हजार होमगार्ड की ड्यूटी, पुलिस विभाग में दे रहे थे सेवाएं



एक झटके में समाप्त कर दी गई 25 हजार होमगार्ड की ड्यूटी, पुलिस विभाग में दे रहे थे सेवाएं

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ Updated Tue, 15 Oct 2019 06:53 PM IST
हाेमगार्ड

खास बातें

  • पुलिस के बराबर वेतन किए जाने के बाद पुलिस व अन्य विभागों ने घटाई होमगार्डों की संख्या
  • कानून व्यवस्था में ड्यूटी करने वाले होमगार्डों की संख्या में भी 32 प्रतिशत तक की कटौती
  • अपर पुलिस महानिदेशक के आदेश के बाद 25 हजार होमगार्ड की सेवाएं हुई समाप्त
उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था और शांति व्यवस्था कायम करने के लिए पुलिस महकमे के बजट से लगाए गए 25 हजार होमगार्ड की सेवाएं लेने से पुलिस महकमे ने मना कर दिया है। एडीजी पुलिस मुख्यालय बीपी जोगदंड ने इस संबंध में आदेश जारी कर दिया है।

इसमें कहा गया है कि कानून व्यवस्था के दृष्टिगत पुलिस विभाग में रिक्तियों के सापेक्ष 25000 होमगार्ड की ड्यूटी लगाई गई थी। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 28 अगस्त को हुई बैठक में इस ड्यूटी को समाप्त करने का निर्णय लिया गया था। इसी क्रम में शुक्रवार को पुलिस मुख्यालय प्रयागराज की ओर से आदेश जारी कर होमगार्ड की तैनाती तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई है।

सूत्रों का कहना है कि पुलिस के सिपाही के बराबर होमगार्ड को वेतन दिए जाने के न्यायालय के निर्देश के बाद प्रदेश में होमगार्ड का एक दिन का वेतन 500 रुपये से बढ़कर 672 रुपये हो गया था। इसका सीधा प्रभाव जिलों के बजट पर पड़ रहा था। इसी को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

ट्रैफिक व्यवस्था पर पड़ेगा असर
फिलहाल जिलों को जो 25 हजार होमगार्ड उपलब्ध कराए गए थे उसका अधिकतर इस्तेमाल ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए हो रहा था। ऐसे में होमगार्ड की सेवा अचानक समाप्त होने से ट्रैफिक व्यवस्था पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
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होमगार्ड को अब 25 नहीं, 15 दिन का मिलेगा काम

सिपाही के बराबर होमगार्ड का वेतन देने का फैसला होमगार्डों के लिए मायूसी का सबब बनने जा रहा है। बढ़े हुए वेतन के चक्कर में पुलिस महकमे ने तय किया है कि वह होमगार्ड से काम नहीं लेगा। यानी एक साल पहले गृह विभाग ने सिपाहियों के रिक्त पदों के स्थान पर जो 25 हजार होमगार्ड लगाए थे, उनकी सेवाएं समाप्त करने का आदेश दिया है। यह निर्णय उच्चतम न्यायालय के आदेश से गड़बड़ाए बजट को बैलेंस करने के लिए लिया गया है।

प्रदेश में होमगार्ड के पद 1 लाख 18 हजार हैं। इसमें से 19 हजार पद रिक्त हैं। पिछले महीने 92 हजार होमगार्ड की ड्यूटी लगाई जा रही थी जबकि उपलब्ध होमगार्ड की संख्या 99 हजार थी।

25 दिन ड्यूटी का मिलता था मौका
ड्यूटी रोटेट करके काम देने से प्रत्येक होमगार्ड को 25 दिन ड्यूटी का मौका मिलता था। अब 25 हजार ड्यूटी खत्म होने से रोटेशन में एक-एक होमगार्ड को महीने में अधिकतम 15-15 दिन का काम मिल पाएगा। ऐसे में उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश का लाभ मिलने के बजाए नुकसान होने जा रहा है।

उदाहरण के तौर पर पहले रोज 500 रुपये भत्ता और 25 दिन काम मिलने से उसे महीने में 12,500 रुपये मिलते थे। अब सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उसे 672 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से भत्ता मिलेगा, लेकिन काम 15 दिन का ही मिलेगा। यानी महीने भर में उसे 10 हजार 80 रुपये ही मिलेंगे।

अगले सत्र का बजट मिलने तक रहेगी मुश्किल

जिलों को दिए गए 25 हजार होमगार्ड में से अधिकतर ट्रैफिक संचालन से जुड़े हैं। ऐसे में अचानक होमगार्ड की सेवा समाप्त होने से ट्रैफिक व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। प्रमुख सचिव होमगार्ड अनिल कुमार ने बताया कि एक दिन की ड्यूटी के बदले 672 रुपये देने से मौजूदा बजट पर असर पड़ा है। नया बजट अगले सत्र में मिलेगा तब तक थोड़ी समस्या रहेगी।

25 हजार होमगार्ड हटाने की उन्हें कोई जानकारी नहीं मिली है। पुलिस के आदेश पर शासन स्तर पर निर्णय लिया जाएगा और आगे की रणनीति तय की जाएगी।

सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर लगे होमगार्डों की ड्यूटी पर भी संकट
प्रदेश में लगभग 9000 होमगार्ड सार्वजनिक प्रतिष्ठानों पर ड्यूटी कर रहे हें। यहां पहले प्राइवेट गार्ड ड्यूटी करते थे। अब इन स्थानों पर फिर से प्राइवेट गार्ड या फिर पीआरडी जवान को ड्यूटी देने पर विचार किया जा रहा है। यहां एक दिन की ड्यूटी के बदले 375 रुपये से 500 रुपये के बीच  मिलता है। ऐसे में आने वाले दिन होमगार्डों के लिए और संकट भरे हो सकते हैं।

अकाल तख्त प्रमुख ने RSS पर बैन लगाने की रखी मांग, कहा- यह तो देश को...

अकाल तख्त प्रमुख ने RSS पर बैन लगाने की रखी मांग, कहा- यह तो देश को...

 देश  report. bhimarmyludhiana

अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अमृतसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हां, इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए. मुझे लगता है कि RSS जिस तरह से काम कर रहा है उससे वह देश में भेदभाव की एक नई लकीर खींच देगा.


अकाल दल का आरएसएस पर बड़ा बयान 
  अकाल तख्त प्रमुख (जत्थेदार) ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की मांग की है. उन्होंने सोमवार को कहा कि RSS जिस तरह से काम कर रहा है, उससे इतना तो साफ है कि यह देश को बांट देगा. अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह ने अमृतसर में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि हां, इसे प्रतिबंधित कर देना चाहिए. मुझे लगता है कि RSS जिस तरह से काम कर रहा है उससे वह देश में भेदभाव की एक नई लकीर खींच देगा. जब अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी हरप्रीत सिंह से बताया गया कि बीजेपी तो खुद RSS मानती है, इसपर उन्होंने कहा कि अगर ऐसा है तो यह देश के लिए अच्छा नहीं है.यह देश को नुकसान पहुंचाएगा और उसे तबाह कर देगा. 
RSS प्रमुख भागवत ने घोषणा की, 'भारत हिंदू राष्ट्र है', कहा- जो भारत भूमि की भक्ति करता है, वह हिन्दू
गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही संघ संचालक मोहन भागवत ने देश में हो रही मॉब लिंचिंग की अलग-अलग घटनाओं को लेकर एक बड़ा बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि ‘भीड़ हत्या' (लिंचिंग) पश्चिमी तरीका है और देश को बदनाम करने के लिए भारत के संदर्भ में इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए. बता दें कि विजयदशमी के मौके पर यहां के रेशमीबाग मैदान में ‘शस्त्र पूजा' के बाद स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने  यह बात कही थी. उन्होंने कहा था कि 'लिंचिंग' शब्द की उत्पत्ति भारतीय लोकाचार से नहीं हुई, ऐसे शब्द को भारतीयों पर ना थोपा जाए. इस दौरान संघ प्रमुख ने कहा कि जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाने के लिए प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह की सराहना की जानी चाहिए. यह एक साहसिक कदम था.
संघ प्रमुख मोहन भागवत ने दिया बड़ा बयान, कहा- एक भी हिन्दू को...
उन्होंने कहा था कि बीते कुछ वर्षों में भारत की सोच की दिशा में एक परिवर्तन आया है, जिसे न चाहने वाले व्यक्ति दुनिया में भी है और भारत में भी, और  निहित स्वार्थों के लिये ये शक्तियां भारत को दृढ़ और शक्ति संपन्न नहीं होने देना चाहतीं. देश की सुरक्षा पर संघ प्रमुख ने कहा कि सौभाग्य से हमारे देश के सुरक्षा सामर्थ्य की स्थिति, हमारे सेना की तैयारी, हमारे शासन की सुरक्षा नीति व हमारे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कुशलता की स्थिति इस प्रकार की बनी है कि इस मामले में हम लोग सजग और आश्वस्त हैं.

संघ प्रमुख मोहन भागवत पहली बार विदेशी मीडिया से करेंगे बात
उन्होंने कहा था कि हमारी स्थल सीमा व जल सीमाओं पर सुरक्षा सतर्कता पहले से अच्छी है. केवल स्थल सीमापर रक्षक व चौकियों की संख्या व जल सीमापर (द्वीपों वाले टापुओं की) निगरानी अधिक बढ़ानी पड़ेगी. देश के अन्दर भी उग्रवादी हिंसा में कमी आयी है. उग्रवादियों के आत्मसमर्पण की संख्या भी बढ़ी है.

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जमीयत प्रमुख की मोहन भागवत से हुई मुलाकात, हिन्दू-मुस्लिम एकता पर हुई बात
भागवत ने कहा था  कि समाज के विभिन्न वर्गों को आपस में सद्भावना, संवाद तथा सहयोग बढ़ाने के प्रयास में प्रयासरत होना चाहिए. समाज के सभी वर्गों का सद्भाव, समरसता व सहयोग व कानून संविधान की मर्यादा में ही अपने मतों की अभिव्यक्ति यह आज की स्थिति में नितांत आवश्यक बात है. दशहरे का पर्व संघ के लिए काफी मायने रखता है क्योंकि इसी दिन 1925 में संगठन की स्थापना हुई थी.इस वार्षिक समारोह में एचसीएल के संस्थापक शिव नादर मुख्य अतिथि थे. जबकि केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी, जनरल (सेवानिवृत्त) वी. के. सिंह और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस भी इस सामारोह में मौजूद रहे.

Thanks
जमीयत प्रमुख की मोहन भागवत से हुई मुलाकात, हिन्दू-मुस्लिम एकता पर हुई बात
बता दें कि इससे पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने असम में एनआरसी से लोगों के बाहर होने को लेकर लोगों की चिंताओं को दूर करने के प्रयास के तहत कहा था कि एक भी हिंदू को देश छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा. माना जा रहा था कि भागवत ने यह टिप्पणी संघ और भाजपा समेत उससे जुड़े संगठनों की बंद दरवाजे के पीछे हुई समन्वय बैठक के दौरान की. समन्वय बैठक के बाद संघ के एक पदाधिकारी ने कहा था कि मोहन भागवतजी ने स्पष्ट कहा कि एक भी हिंदू को देश नहीं छोड़ना होगा.  उन्होंने कहा था कि दूसरे राष्ट्रों में प्रताड़ना और कष्ट सहने के बाद भारत आए हिंदू यहीं रहेंगे. असम में बहुप्रतीक्षित राष्ट्रीय नागरिक पंजी (एनआरसी) की 31 अगस्त को जारी हुई अंतिम सूची में 19 लाख से ज्यादा आवेदकों के नाम नहीं हैं.

Monday, October 14, 2019

अभिजीत बनर्जी: जेएनयू, तिहाड़ जेल, नोटबंदी की आलोचना से नोबेल पुरस्कार तक